Gulami se Aazadi tak

Gulami se aazadi tak

कभी आपने सोचा है आप कितने भाग्यशाली है ,आप जिस देश में रहते है वो एक आज़ाद /स्वतंत्र देश है?

मै भाग्यशाली हू कि मै स्वतंत्र भारत में जन्मा और मुझे आज़ाद हवा में जीवन जीने का सौभाग्य प्राप्त हुआ, हमारे पूर्वज जो हज़ारो वर्षो तक विदेशी अक्रान्ताओ के अत्याचारों से लड़ते रहे और आखिरकार हमने 1947 में आज़ादी प्राप्त की |

इस आज़ादी को प्राप्त करने के लिए न जाने कितने लोग देश के लिए शहीद हुए , हम तो शायद कुछ ही गिने चुने लोगो को जानते है ?, हम तो शायद ये भी नहीं जानते की हम भारत वर्ष के लोग कब से गुलाम है, हमे सिर्फ ये पढ़ाया और सिखाया जाता है के भारत को ब्रिटिश ने गुलाम बनाया। हंसी आती है इस सोच पर |

भारतवर्ष पर पहला विदेशी हमला हुआ 715 AD में और ये हमला किसने किया ? एक अरब ने जिसका नाम था मोहम्द बिन कासिम, और हमले का मूल उद्देश्य इस्लाम को बढ़ाना।

अगर आप ध्यान दे तो जो पहला आक्रमण जो विदेशी द्वारा किया गया उसका उद्देश्य केवल भौगोलिक विस्तार नहीं अपितु धार्मिक विस्तार था और भारत ही एक ऐसा देश है जिसने हज़ारो वर्ष इन धार्मिक अक्रान्ताओ के ज़ुल्म सहे किन्तु अपनी मूल से नहीं डिगा, जहा और देशो का ज़िक्र करे तो ईरान एक पारसी देश था किन्तु इस्लामी अरब अक्रान्ताओ के कारण 11 शताब्दी तक वो पूर्णता इस्लामी हो गया, वही अफगानिस्तान भी इसी दौर में इस्लाम की बलि चढ़ गया (अफगानिस्तान में मूलतः बौद्ध और हिन्दू धर्म के अनुयाई थे)

में जो बात जानना और बताना चाहता हूँ वो यह है की हम क्या पूर्णता आज़ाद हो गए हैं ? क्यों कि आज़ादी तब तक नहीं होगी जब तक अक्रान्ताओ का मूल उद्देश्य ज़िंदा है और उस उद्देश्य का समर्थन करने वाले और उसको बढ़ाने वाले इस देश में मौजूद हैं |

परतन्त्रता / गुलामी दो प्रकार की होती है एक भौतिक परतन्त्रता और दूसरी मानसिक परतन्त्राता , परतन्त्राता दोनों ही प्रकार की ख़राब है लेकिन मानसिक परतन्त्रता घातक है, जैसा की मैंने ऊपर ज़िक्र किया अक्रान्ताओ का उद्देश्य इस्लाम का प्रसार था जो आज भी चल रहा है | हम इस हज़ारो वर्षो की गुलामी का नतीजा 1947 में भुगत चुके है जब देश को उसी उद्देश्य ने दो टुकड़ो में बटवा दिया, और केवल बटवाया ही नहीं सदा के लिए एक नासूर बना दिया |

जो लोग आज भी उस उद्देश्य को पूरा करने में लगे है वो हमारे घर में बैठे हमारे ही भाई बंद है और वो आज भी ऐसा इस लिए कर रहे है क्योकि उन्हें पूर्ण स्वतंत्रता नहीं मिली है , वो भौतिक रूप से तो आज़ाद हुए है लेकिन मानसिक रूप से वो आज भी उस उद्देश्य के गुलाम है जिसने भारत को नजाने कितने घाव दिए हैं |

क्योकि वो लोग हमारे देश के निवासी है तो ये हमारा दायित्व बनता है की हम उन्हें मानसिक आज़ादी की और  ले जाये और उन्हें पूर्ण आज़ादी दिलाये |

अगर हमने यह कदम नहीं उठाया तो वो दिन दूर नहीं ये मानसिक गुलाम फिर से एक और हिस्सा मांग ले, हमे चाहिए की हम आगे बड़े और आह्वाहन करें इन 20 करोड़ मानसिक गुलामो को, मानसिक आज़ादी दिलाकर इनके विश्वास को हमारे विश्वास से जोड़े जो की असल में इनके पूर्वजो का भी था, हमे ये कभी नहीं भूलना चाहिए की फल अगर सड़ भी जाये तो भी उसके अंदर जो बीज होता है वो पूर्णतया नवीन वृक्ष को जन्म दे सकता है किन्तु प्रयास उस सड़े आवरण का जल्दी से जल्दी हटाने का होना चाहिए |

अगर हमने उस सड़े आवरण (उद्देश्य) को नहीं हटाया तो वो दिन दूर नहीं जब भारत भी ईरान, अफगानिस्तान या पाकिस्तान होगा, मेरा विनम्र निवेदन उन सभी देशवासिओ से है जो पूर्णता स्वतंत्र है यानि उनकी मानसिक स्थिति वैसी ही है जो विदेशी अक्रान्ताओ के आने से पहले थी कि आयो मिलकर मानसिक गुलामो को गुलामी से आज़ादी तक के सफर पर ले चले और भारतवर्ष का भविष्य उज्जवल करे |

|| शुभास्ति शीघ्रम ||